क्या अवैध संबंध की भेंट चढ़ गए लोजपा नेता अनिल उरांव ?शव मिलने के बाद जिला मुख्यालय में हुआ विरोध प्रदर्शन व तोड़फोड़ ।      



           


     
           - लोजपा नेता अनिल उरांव का  29 अप्रैल को हुआ था जिला मुख्यालय से अपहरण ।
          - अपहर्ताओं ने रिहाई के एवज में 10 लाख रुपये परिजनों से वसूला।
           - पुलिस के तमाम दावे के वाबजूद 60 घण्टे बाद अनिल की हुई लाश बरामद।
        - एक महिला समेत तीन लोगों की हुई गिरफ्तारी , अवैध संबंध हो सकती है हत्या की वजह ।

रिपोर्ट - पंकज भारतीय


पूर्णिया / पूरी घटना की पटकथा 70 के दशक के हिंदी फिल्म जैसी है , जहां अपहरण होता है , फिर फिरौती मांगी जाती है , फिरौती लेकर किसी खंडहर या पहाड़ी के पीछे बुलाया जाता है , साथ मे पुलिस को नही लेने की चेतावनी दी जाती है , पुलिस साथ जाती है तो फ़ोन पर धमकी दी जाती है कि तुमने बहुत बड़ी गलती की है , बाद में बाइक सवार दो अपराधी फिरौती भी सिनेमाई अंदाज में ले जाता है , हैरानी इस बात की है कि 60 घण्टे के इस घटनाक्रम में वह पुलिस मूक दर्शक बनी रहती है जो वैज्ञानिक अनुसंधान का दावा करती रही है।परिणाम , वही सामने आया ,जिसका अंदेशा था , लोजपा नेता अनिल की लाश केनगर थाना क्षेत्र के झुंनी इस्तम्बरार पंचायत के डंगरहा गांव से 02 मई की सुबह बरामद होती है ।उंसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा , लोगों ने सड़क पर उतर कर आगजनी की और तोड़फोड़ भी किया।बाद में पुलिस अधीक्षक दयाशंकर के आश्वासन के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ । एसपी के अनुसार मामले में एक महिला समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है , अन्य दोषियों को भी शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।

क्या अवैध संबंध में गई अनिल उरांव की जान ? 'हनी ट्रैप का था शिकार !
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          अनिल का जब अपहरण हुआ था तो कयास लगाए जा रहे थे कि चूंकि अनिल जमीन की ब्रोकरी से जुड़ा था , लिहाज़ा कोई लेन -देन घटना की वजह रहा होगा। लेकिन धीरे -धीरे स्पष्ट हुआ कि अनिल "हनी ट्रैप "का शिकार था और इसी अवैध संबंध की कीमत उसे जान देकर चुकानी पड़ी है । दरअसल , कोसी कॉलोनी में रह रही एक महिला से अनिल के मधुर संबंध थे और उस महिला के कोसी कॉलोनी में रह रहे एक रिटायर्ड कर्मी के पुत्र अंकित यादव से भी गहरे ताल्लुकात थे। उक्त महिला ने पेशे से चालक युवक से अंतर्धार्मिक विवाह भी कर रखा है ,जो पूर्णिया विश्वविद्यालय के उच्चपदस्थ अधिकारी का वाहन चलाता है।बताया जाता है कि , अनिल के महिला मित्र ने ही फ़ोन कर अनिल को बुलाया था ।यही वजह थी कि हमेशा सुरक्षा गार्ड के साथ चलने वाला अनिल अकेले ही हाफ पैंट में ही घर से कोसी कॉलोनी के लिए निकल पड़ा , जहां से उसे अगवा कर लिया गया। अनिल की महिला मित्र गिरफ्तार हो चुकी है ।यह बात स्पष्ट नही हो पाई है कि हत्या फिरौती लेने से पहले हुई या लेने के बाद और फिरौती लेने के बाद भी अनिल की हत्या क्यों कर दी गई ? सम्भव है कि अवैध संबंध की वजह से ही अनिल की हत्या कर दी गई हो और इसमें दूसरे आशिक अंकित की अहम भूमिका हो ।एसपी दया शंकर सीधे तौर पर तो स्वीकार नही करते हैं ,लेकिन मानते हैं कि अवैध संबंध के एंगल पर भी पड़ताल जारी है। तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है ,शीघ्र ही मामले का खुलासा हो जाएगा।

विरोध में शहर में हुआ तोड़फोड़ और प्रदर्शन 
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        अनिल की सकुशल रिहाई को लेकर शनिवार को भी शहर में विरोध प्रदर्शन हुआ था। तब पुलिस ने 24 घण्टे का समय मांगा था।लेकिन, अनिल की लाश वापस आई।लिहाज़ा , रविवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और शहर में जगह -जगह आगजनी कर सड़कों को बाधित कर दिया गया । डीआईजी चौक और समाहरणालय के पास दो पुलिस वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया और दुकानों में भी तोड़ -फोड़ की गई। अनिल के शव को आर एन शाह चौक पर रखकर प्रदर्शन जारी रखा गया ।बाद में एसपी दयाशंकर द्वारा सभी दोषियों की गिरफ्तारी और स्पीडी ट्रायल चलाने के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

पूरे प्रकरण में सवालों के घेरे में है स्थानीय पुलिस की भूमिका 
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        अपहरण और फिर फिरौती की मांग के वाबजूद स्थानीय पुलिस ने जिस तरह चलताऊ तरीके से इस मामले में कार्रवाई की वह लोगों के समझ से परे है। मिली जानकारी अनुसार ,अपहरणकर्ताओं द्वारा  परिजनों को कुल 06 बार फिरौती के लिए फ़ोन किया गया , ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान का दावा करने वाली पुलिस किस कारण से खामोश रही ,यह बड़ा सवाल है ? परिजनों का कहना है कि अगर आरम्भ से ही पुलिस सक्रिय रहती तो शायद अनिल की जान बच सकती थी ।सवाल कई अनुत्तरित हैं ,जिसका जवाब आना शेष है ।





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