क्या राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस गए जाप संरक्षक पप्पू यादव  ? मधेपुरा के 32 वर्ष पुराने अपहरण के मामले में हुई गिरफ्तारी ।


 

       - पहले हुई पटना पुलिस द्वारा मंगलवार को पेंडेमिक एक्ट के तहत गिरफ्तारी।
    - उदाकिशुनगंज एसडीपीओ संतीश कुमार के नेतृत्व में मधेपुरा पुलिस पप्पू यादव की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पटना।
   - मुरलीगंज थाना में दर्ज कांड संख्या 09 /89 में फरारी घोषित थे पप्पू यादव।
    - पटना एस एसपी उपेंद्र कुमार शर्मा ने मधेपुरा मामले में गिरफ्तारी की किया पुष्टि।

रिपोर्ट - पंकज भारतीय 

पूर्णिया / कोविड महामारी के दौरान अस्पताल से लेकर श्मशान तक किसी मसीहा की तरह पीड़ितों के बीच सेवा के लिए मौजूद रहने वाले बाहुबली राजनेता जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पूर्व सांसद राजेश यादव उर्फ पप्पू यादव  क्या राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस गए हैं ? 07 मई को सारण के भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूढ़ि के आवासीय परिसर में रखे हुए तीन दर्जन से अधिक एम्बुलेंस के  सनसनीखेज खुलासे के बाद पप्पू यादव की लगातार कानूनी घेराबंदी जारी रही ।पहले छपरा में एफआईआर हुआ और अब 11 मई को श्री यादव को पटना पुलिस द्वारा पेंडेमिक एक्ट के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया । लेकिन , इसी बीच एक नाटकीय घटनाक्रम में मधेपुरा पुलिस उदाकिशुनगंज अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संतीश कुमार के नेतृत्व में मंगलवार की शाम पटना पहुंची और श्री यादव को 32 वर्ष पुराने अपहरण के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया ।इस मामले में श्री यादव न्यायालय द्वारा फरार घोषित हैं । पेंडेमिक एक्ट के तहत जो मामला श्री यादव के खिलाफ दर्ज हुआ ,उसकी धाराएं जमानतीय थी ।लेकिन , अपहरण मामले में श्री यादव की गिरफ्तारी उनके लिए परेशानी का सबब साबित हो सकती है।अपहरण मामले में श्री यादव की गिरफ्तारी की पुष्टि पटना  एस एसपी उपेंद्र कुमार शर्मा ने किया है।  जन अधिकार पार्टी युवा परिषद के प्रदेश प्रवक्ता राजेश यादव कहते हैं कि , राज्य सरकार राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित है और श्री यादव की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा कर इस तरह की कार्रवाई कर रही है।श्री यादव की गिरफ्तारी से परिजनों और समर्थकों में रोष व्याप्त है ।

क्या है पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज अपहरण का मामला ,जिसमे हुई गिरफ्तारी 
-------------------------------------------
         दरअसल , 32 वर्ष पूर्व , वर्ष 1989 में मधेपुरा के मुरलीगंज थाना में  रामकुमार यादव नाम के शख्स के अपहरण के आरोप में उभरते बाहुबली पप्पू यादव के खिलाफ कांड संख्या 09 /89 दर्ज हुआ था ।उंसके बाद बाहुबल के रास्ते राजनीति में पप्पू यादव की धमाकेदार इंट्री हुई और वे 1990 में मधेपुरा के सिंघेश्वर विधान सभा से निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए । वक्त के साथ , चुनावी सियासत में पप्पू यादव ने कई सफलताएं अर्जित की और विवादों के साथ भी उनका करीब का  रिश्ता रहा ।लिहाज़ा , श्री यादव के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए , जो अब सामान्य बातें थी । ऐसे में संभव है कि , मुरलीगंज थाना में दर्ज यह अपहरण कांड श्री यादव के संज्ञान में नही रहा हो ,और यही कांड अब उनके लिए परेशानी का सबब बनकर सामने आया है ।हालांकि , इस कांड की चर्चा विधान सभा चुनाव 2020 में तब खूब हुई थी जब श्री यादव मधेपुरा विधान सभा चुनाव में खुद प्रत्याशी थे। पूर्णिया सदर विधान सभा से अंतिम समय मे सारी तैयारी के वाबजूद नामांकन नही करने का कारण भी तब इसी कांड में पुलिस की सक्रियता को माना गया था।
     सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार , मुरलीगंज थाना कांड संख्या 09/89 जो मधेपुरा न्यायालय में जीआर 68/89 के तहत संचालित है , में पप्पू यादव को पहले जमानत मिली थी ।कालांतर में श्री यादव के अधिवक्ता द्वारा केस की सुनवाई में हिस्सा नही लेने की वजह से श्री यादव के जमानत को रद्द कर दिया गया और उन्हें फरार घोषित कर दिया गया । इस मामले में हालिया , एसीजीएम 1 मधेपुरा द्वारा 22 मार्च 2021 को श्री यादव के खिलाफ कुर्की -जब्ती की कार्रवाई का भी आदेश निर्गत किया गया है ।चूंकि , श्री यादव का पैतृक निवास कुमारखंड थाना क्षेत्र के खुर्दा गांव में है , लिहाज़ा वारंट और कुर्की -जब्ती का आदेश कुमारखंड थाना को ही भेजा गया और कुमारखंड पुलिस द्वारा ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई ।

क्या राजनीतिक चक्रव्यूह के शिकार हुए पप्पू यादव ?
----------------------------------------------
         मामला भले ही न्यायिक क्षेत्र से जुड़ा हो ,लेकिन हालिया घटना क्रम के बाद से जिस प्रकार सत्ताधारी दल के निशाने पर पप्पू यादव रहे हैं और 32 वर्ष पुराने मामले में जिस तरह से उनकी गिरफ्तारी हुई है , उससे सवाल उठना स्वाभाविक है।बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुलिस इतने दिनों से लंबित वारंट का तामिला क्यों नही करा पाई ? पेंडेमिक एक्ट का उल्लंघन तो श्री यादव कई सप्ताह से कर रहे थे तो छपरा प्रकरण के बाद ही उनकी क्यों गिरफ्तारी हुई ?  उनके समर्थक अगर कहते हैं कि पप्पू यादव राजनीतिक चक्रव्यूह का शिकार हुए हैं तो उसे सिरे से खारिज भी  नही किया जा सकता है । सवाल कई हैं , एक बात तय है कि पप्पू यादव जो पोलिटिकल माइलेज पटना बाढ़ में सक्रिय होकर हासिल नही कर सके , वह पहचान उन्हें इस कोविड मे सक्रियता की वजह से हासिल हो चुकी है । श्री यादव के इस लोकप्रियता के इजाफे में राज्य सरकार के नुमाइंदे की अदूरदर्शिता के योगदान से इनकार नही किया जा सकता है।





Related Post