दोहरी त्रासदी ,शहीद इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार की मां उर्मिला देवी ने बेटे के गम में दम तोड़ा।ग्रामीणों ने कहा हो सीबीआई जांच ,नही करेंगे अंतिम संस्कार।


 

    -मां की मौत के बाद ग्रामीणों में है आक्रोश व्याप्त।
    -परिजन उर्मिला देवी की मौत के लिए भी कर रहे एफआईआर दर्ज करने की मांग।
   -ग्रामीणों ने किया अंतिम संस्कार से इनकार , किया सीबीआई जांच की मांग।


रिपोर्ट - पंकज भारतीय

पूर्णिया / प्रारब्ध की क्रूर मर्जी कहें या नियति का खेल , 10 अप्रैल की अहले सुबह प बंगाल के पांजी पाड़ा थाना  क्षेत्र के पनता पाड़ा में अपराधियों के हाथों शहीद हुए किशनगंज टाउन थाना के थानेदार अश्विनी कुमार की मां ने पुत्र वियोग में दम तोड़ दिया है।शहीद इंस्पेक्टर की 75 वर्षीया मां उर्मिला देवी ने रविवार 11 अप्रैल को सुबह 06 बजे अंतिम सांस ली।गौरतलब है कि पुत्र की हत्या के बाद से ही वृद्ध माँ की तबियत बिगड़ने लगी थी और परिजन दूसरी अनहोनी की आशंका से चिंतित थे जो सच साबित हुआ।वहीं , ग्रामीणों ने हत्याकांड की जांच हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग करते हुए माँ -बेटे के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है।मौके पर मौजूद बनमनखी एसडीपीओ विभाष कुमार परिजनों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
       इस दोहरी त्रासदी की खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा मृतक के पैतृक गांव जानकीनगर थाना क्षेत्र के अभयराम चकला पंचायत के पांचू मंडल टोला में हो गया।लोगों में अश्विनी के साथ गए पुलिस बल खासकर इंस्पेक्टर मनीष कुमार के प्रति गहरी नाराजगी है।उनका मानना है कि अगर साथी पुलिसकर्मी भाग खड़ा नही होता तो अश्विनी की जान बच सकती थी।ग्रामीण पुलिस कर्मियों के निलंबन को नाकाफी बता रहे हैं।वे चाहते हैं कि उनके खिलाफ हत्या का एफआईआर दर्ज हो और उस अनुरूप प्रकिया संचालित हो।नए घटनाक्रम के बाद ,परिजन शहीद की मां की मौत को अश्विनी की मौत से जोड़कर  एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रहे हैं ।बहरहाल ,पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है ।निश्चित तौर पर जब मां -बेटे की जब एक साथ अर्थी उठेगी तो वह पल त्रासदी की उस इबारत का साक्षी बनेगा जो दशकों तक कई कारणों से याद किया जाएगा जिसमे सस्पेंस होगा , एक पुलिस अधिकारी की जांबाजी होगी ,वही साथी पुलिस कर्मियों की रण छोड़ने की कहानी भी होगी और एक माँ का बेटे के लिए ताउम्र दिल धकडने और साथ श्मशान तक कि यात्रा की त्रासद गाथा भी होगी।





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