भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा महंगा ,सुपौल निवासी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह हुए गिरफ्तार ।


 

 

रिपोर्ट - मनोज रोशन 

 

सुपौल /लगभग डेढ़ दशक से राजनीतिक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले भ्रष्टाचार मुक्त कोसी जागरूकता अभियान के संयोजक सह आरटीआई कार्यकर्ता सुपौल निवासी अनिल कुमार सिंह को आखिर कीमत  चुकानी ही पड़ी।शनिवार की शाम भारत दर्शन के तहत बिभिन्न धार्मिक स्थलों के भ्रमण  से वापस लौट रहे अनिल कुमार सिंह को सुपौल सदर पुलिस ने बड़े ही नाटकीय ढंग से सहरसा में गिरफ्तार कर लिया ।उंसके बाद बिना परिजनों को सूचित किये श्री सिंह को किशनपुर थाना ले जाया गया ।जहां से उन्हें रविवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया ।श्री सिंह की गिरफ्तारी सुपौल निवासी एक महिला अनुप्रिया द्वारा दर्ज मुकदमा के आलोक में की गई है जिसमे उसने श्री सिंह पर भयादोहन, कमीशन मांगने और गाली -गलौज का आरोप लगाया  है।न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से पूर्व द शंख टाइम्स से श्री सिंह ने कहा ' भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को प्रताड़ित किया जाना कोई नई बात नही है।हर कोई जानता है कि मुझे जिले के सबसे कद्दावर राजनेता और जिले के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ होने की सजा दी जा रही है।शिकायतकर्ता महिला महज मोहरा है।आप मुझे जेल भेज सकते हैं , मेरे संकल्प की धार को कुंद नही कर सकते हैं ।देश की कानून व्यवस्था में मुझे पूरा विश्वास है , सत्य परेशान हो सकता है ,पराजित नही '।

 

क्या है पूरा मामला और दर्ज एफआईआर

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   दरअसल जिले के वीरपुर में जलसंसाधन विभाग के मातहत करोड़ों की लागत से कौशकी भवन का निर्माण हुआ और उसमें लगभग 07 करोड़ की फर्नीचर और साजो -सामान की आपूर्ति हुई थी ।मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला अनुप्रिया गोदरेज कंपनी का कारोबार करती है।आरोप है कि आपूर्तिकर्ता अनुप्रिया के फार्म द्वारा जो सामान की आपूर्ति गोदरेज कहकर की गई वह गोदरेज की नही थी ,उसपर केवल फर्जी लेबल लगा हुआ था ।इतना ही नही ,कई सामानों की आपूर्ति भी नही की गई ,जबकि सारा भुगतान हो गया।इसी बाबत अनिल कुमार सिंह द्वारा अगस्त 2020 में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगकर फर्जीवाड़े को उजागर किया था ।जिसकी जांच अभी चल रही है।सूत्र बताते हैं कि गोदरेज के इस खेल में कई सफेदपोश और बड़े खिलाड़ी पर्दे के पीछे थे और तिलमिलाए हुए थे।अब 06 फरवरी को मामला अनुप्रिया द्वारा दर्ज कराया गया है ।सुपौल थाना में आईपीसी की धारा 387,504,506 और 509 के तहत कांड संख्या 94/21 दर्ज कर श्री सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

कई रसूखदारों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे अनिल 

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       आरटीआई के माध्यम से श्री सिंह बीते डेढ़ दशक में एक दर्जन से अधिक बड़े  सरकारी घोटाले का पर्दाफाश कर चुके हैं ।गत वर्ष और इस वर्ष उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं के लिए सुपौल में राज्य स्तरीय वर्कशॉप का भी आयोजन किया था।भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा मुखर रहने वाले बेबाक श्री सिंह कई रसूखदारों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे।श्री सिंह ने वर्ष 2020 का विधान सभा चुनाव सुपौल सदर विधान सभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी लड़ा था।श्री सिंह के परिजनों का मानना है कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का शिकार हुए हैं ।हाल ही में श्री सिंह तब चर्चा में रहे जब उन्होंने सुपौल डीएम महेंद्र कुमार के खिलाफ कार्मिक विभाग ,भारत सरकार में शिकायत दर्ज कराया था।मामला पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री स्व एल एन मिश्र के बलिदान दिवस में उनकी अनुपस्थिति से जुड़ा था ।इसके अलावा भी वे भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले को लेकर लगातार संघर्ष रत थे ,जिस वजह से जहां उनके समर्थंकों की संख्या अच्छी -खासी थी तो ऐसे लोग भी थे जो मौके की तलाश में थे ।अनुप्रिया द्वारा अपनी शिकायत सीधे डीएम और एसपी को देना और आनन फानन में गिरफ्तारी पूरी कहानी की हकीकत को उजागर करता है ।जांबाज सुपौल पुलिस ने जितनी घेराबंदी और सक्रियता आरटीआई कार्यकर्ता की गिरफ्तारी में दिखाई ,उतनी अगर जदिया एटीएम कांड के आरोपी और महेशपुर हत्या व लूटकांड मामले के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी में दिखाई होती तो उसकी भद पीटने से बच जाती ।





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