रसूखदारों , राजनेताओं और अधिकारियों की दुलारी के थे 5 जी नेटवर्क , नफा - नुकसान की बिसात पर हिचकोले खा रही अनिल उरांव की मर्डर मिस्ट्री ।


 

रिपोर्ट - पंकज भारतीय 

पूर्णिया / अजीब विडम्बना है , युवा लोजपा नेता अनिल उरांव की नृशंस हत्या को एक सप्ताह से अधिक गुजर चुके हैं , हत्याकांड की अहम सूत्रधार दुलारी उर्फ प्रियंका सलाखों के पीछे है , अहम किरदार अंकित फरार है , मास्टरमाइंड की तलाश पर पुलिसिया मंथन जारी है , लेकिन सबसे अधिक सुर्खियों में दुलारी उर्फ प्रियंका है ।जबकि , सच्चाई यही है कि दुलारी ने लाइनर की भूमिका निभाई और उसके बाद अंकित ने जो चाहा , वही हुआ ।बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है कि अंकित के पीछे क्या कोई सफेदपोश शातिर का हाथ रहा है ? क्या वैसे लोगों ने अनिल की हत्या में महती भूमिका निभाई ,जिसे अनिल के नही होने से आर्थिक लाभ होता ?यकीन मानिए , अगर पुलिस की फाइलों में अनिल हत्याकांड को केवल विवाहेत्तर संबंध या अवैध संबंध के नजरिये से देखा जा रहा है तो पूर्णिया पुलिस के नाम एक बड़ा तोहमत लगना तय है ।

महज 03 -04 वर्षों में दुलारी ने स्थापित कर लिए 05 जी नेटवर्क 
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       पुरानी कहावत है , हुश्न हो तो नजाकत आ ही जाती है। 17 वषों में 03 शादियां रचाकर जूली उर्फ प्रियंका उर्फ दुलारी ने भविष्य का संकेत दे दिया था । लेकिन , दुलारी के हुश्न और नजाकत को तब मुकाम मिला जब उसकी मुलाकात पेशे से चालक राजा से हुई ,वह तीसरा पति बना और वर्ष 2017 से स्थाई तौर पर पूर्णिया में रहने  लगी । इत्तफाकन , पति राजा पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति का चालक बन गया और दुलारी ने भी अपने कौशल का इस्तेमाल कर आउटसोर्स एजेंसी के मार्फ़त नौकरी हासिल कर ली। इस दौरान दुलारी के शहर के कई राजनेता , रसूखदारों , अपराधी , वार्ड पार्षद , विश्वविद्यालय के अधिकारियों , संवेदकों से करीब का रिश्ता स्थापित करने में सफलता हासिल किया। सबों की दुलारी बन चुकी दुलारी के 05 जी नेटवर्क का आलम यह था कि कई सिलीगुड़ी की सुंदरियां भी उंसके संपर्क में थी और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी ।चर्चा ,यह है कि दुलारी के मोबाइल कॉल डिटेल में शहर के कई नामचीन लोगों से बातचीत के सबूत हैं तो उसके एंड्राइड मोबाइल में भी कई अंतरंग चैट और तस्वीरें भी कैद है। जाहिर है ऐसे लोग की नींदें उड़ चुकी है और कुछ लोगों के चेहरे की मुस्कान दुलारी के स्वीकारोक्ति बयान से अब वापस आ चुकी है, क्योंकि उस बयान से वे अछूते हैं  ।लेकिन , जरा ठहरिये , पुलिसिया अनुसंधान में कई पिक्चर अभी बांकी हैं , बशर्ते सब कुछ ठीक रहा तब , क्योंकि हत्यारा अंकित महज प्यादा भी साबित हो सकता है।शायद , यही वजह है कि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह मर्डर मिस्ट्री कहीं हमेशा के लिए पहेली न बन कर रह जाए।

क्या अनिल उरांव की हत्या नफा -नुकसान से है जुड़ा 
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          इतना तो तय है कि केवल दुलारी से नजदीकियों की वजह से अनिल की हत्या नही हुई ।अनिल और अंकित की तरह दुलारी के कई फैन थे ,यह अंकित को भी पता था। अब सवाल यह है कि अनिल की हत्या से किस -किस को लाभ मिल सकता है। अनिल जमीन का बड़ा कारोबारी था , करोड़पति था , कई भूमाफिया से उंसके लेन -देन को लेकर विवाद की बात भी सामने आ रही है ।कई लोगों के ऊपर अनिल का लाखों -करोड़ों की उधारी भी थी ।चर्चा यह भी है कि अनिल ने नल -जल योजना में भी करोड़ों की राशि लगा रखा था ।परिजन भी मानते हैं कि हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई और है ? कुल मिलाकर वक्त के साथ जो बातें निकलकर सामने आ रही है ,उससे जाहिर है कि नफा -नुकसान की शतरंजी बिसात पर ही अनिल उरांव की हत्या की पटकथा लिखी गई है ,और कानून के लंबे हाथ कितनी ऊँचाई तक पहुंच पाती है , आने वाला वक्त ही बताएगा।





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