हनी ट्रैप का  शिकार अनिल उरांव की हत्या सुनियोजित थी या अप्रत्याशित ? दुलारी लाइनर , अंकित फ्रंट लाइनर तो   हत्याकांड का मास्टरमाइंड कौन ?


 

                   - क्या 10 लाख था महज बहाना , अनिल उरांव ही था निशाना ।
            - अंकित का  रहा है भूमि माफियाओं के साथ करीबी संबंध।
               -अनिल के परिजन भी हत्या में साजिश की जता रहे हैं संभावना।


रिपोर्ट - पंकज भारतीय 

पूर्णिया / युवा लोजपा नेता अनिल उरांव की हत्या की गुत्थी सुलझ कर भी अनसुलझी है । प्रथम दृष्टया ,स्पष्ट है कि अनिल उरांव हनी ट्रैप के शिकार हुए , उनकी महिला मित्र दुलारी उर्फ प्रियंका ने अंकित यादव के साथ अनिल का सौदा किया , इस सौदे में ही अनिल की जान चली गई । लेकिन , इस मर्डर मिस्ट्री का यह पूरा सच नही भी हो सकता है ।जरायम सूत्रों के अनुसार , यह सम्भव है कि अंकित ने दुलारी के साथ समझौते से अलग एक दूसरा भी समझौता कर रखा हो और इस नए डील के एवज में ही अनिल की हत्या कर दी गई हो । तो क्या अंकित ने एक तीर से दो शिकार किया है ? क्या अनिल की हत्या सुनियोजित थी ? मूल सवाल दुलारी लाइनर , अंकित फ्रंट लाइनर तो हत्याकांड का मास्टर माइंड कौन है ?  सवाल और कई हैं , जवाब केवल अंकित के पास है , जो बहरहाल पुलिस के साथ आंखमिचौनी खेल रहा है।

थी फिरौती लेकर छोड़ने की बात तो ,फिर क्यों हुई अनिल की हत्या
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        यह सौ फीसदी सच है कि दुलारी के साथ अनिल के बेहतर संबंध थे । दुलारी के यूं तो शहर में कई कद्रदान थे , लेकिन अंकित के साथ उसका रिश्ता खास था ।हालांकि , यह भी सच है कि अनिल के साथ दुलारी की नजदीकी अंकित को रास नही आ रही थी । जरा गौर से समझिए अपराध मनोविज्ञान को , हत्या के तरीके से इस बात के संकेत मिलते हैं कि अंकित को अनिल का दुलारी के साथ नजदीकी नापसन्द था ।यही वजह है कि अनिल की न केवल  पीट - पीट कर हत्या की जाती है बल्कि उसकी दोनों आंखें भी फोड़ दी जाती है। पुलिस की यह थ्योरी की अनिल की हत्या इस डर से कर दी गई की भेद न खुल जाए , बचकानी है।अंकित अनिल की हैसियत और पहुंच से बखूबी वाकिफ था , एक -दूसरे से वाकिफ था तो भेद खुलने की कोई बात ही नही थी । 10 लाख रुपये देने के बाद भी अनिल पूरे घटनाक्रम को अपने सीने में दफन ही रखता ,क्योंकि अनिल के राजनीतिक कैरियर की कीमत 10 लाख से 1000 गुना अधिक थी । जाहिर है कि फिरौती लेने के बाद भी अगर अंकित ने अनिल की हत्या कर दी तो यह अप्रत्याशित नही सुनियोजित थी ।

क्या अंकित ने अनिल की हत्या के लिए किया था दूसरा डील !
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       अनिल के परिजन भी मानते हैं कि हत्या में पर्दे के पीछे कोई अहम सूत्रधार खड़ा है। तो क्या किसी भूमाफिया ने अनिल की हत्या में मास्टरमाइंड की भूमिका निभाया है।अगर ,यह सच है तो दुलारी को अंधेरे में रखकर अंकित ने किसी से अनिल की हत्या के लिए निश्चित तौर पर डील किया है । इस बात की संभावना इसलिए भी है कि अनिल शहरी जमींदार के साथ -साथ जमीन की ब्रोकरी से भी जुड़ा हुआ था। चर्चा यह है कि इस पेशे में वह अपराध की दुनिया से जमीन ब्रोकरी के कारोबार में  आने वाले कई अपराधियों की आंखों की किरकिरी बना हुआ था। ऐसे में अनिल को सीधे तौर पर नुकसान पहुचाने की बजाय अगर अंकित को मोहरा बनाया गया हो तो आश्चर्य नही होना चाहिए।अब यह अंकित की गिरफ्तारी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह नया डील पूर्व नियोजित था या  अपहरण के बाद नए डील को फाइनल किया गया । इस  संभावना में दम इसलिए है कि फिरौती  लेकर अनिल की हत्या की गई है।

अंकित का नही है कोई ख़ास आपराधिक इतिहास, लेकिन अपराधियों से है ताल्लुकात 
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           अंकित का अब तक कोई खास आपराधिक इतिहास नही रहा है ,लेकिन उसके भाई का आपराधिक इतिहास रहा है।अपहरण -हत्याकांड में शामिल रहा और अब सलाखों के पीछे बंद राकेश उर्फ चुनमुन झा और मो शाकिब उर्फ राहुल के खिलाफ केहाट थाना में आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है । बताया जाता है कि दोनों स्मैक का भी खुदरा कारोबारी रहा है ।अंकित , का भले ही आपराधिक इतिहास नही रहा हो लेकिन अपराधियों से उंसके गहरे ताल्लुकात रहे हैं ।कोसी कॉलोनी स्थित आवास पर ऐसे तत्वों का आना -जाना लगा रहता था। अंकित को उन अपराधियों के साथ भी देखा गया है जो कुछ नामचीन अपराधियों के नाम पर शहर में विवादित जमीन पर कब्जा कर लाखों की जमीन से करोड़ों की कमाई करता है । यही वजह है कि शक की सुई बार -बार उस ओर घूम जाती है कि , अंकित ने एक तीर से दो शिकार कर अपराध की दुनिया मे जोरदार इंट्री किया है , जिसकी चाहत उसे भी थी ।बहरहाल , इस मर्डर मिस्ट्री के अंतिम खुलासे पर सबों की निगाहें है क्योंकि इसमें गैर विवाहेत्तर संबंध है , इश्क है ,धोखा है , सनसनी है , सफेदपोश है और पुलिस की विफलता भी है।





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